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Amit Sharma

Articles

कहां-कहां से गुजरी दिल्ली

दिल्ली विधानसभा के चुनाव नजदीक हैं। पांच फरवरी को मतदान है। आठ फरवरी को चुनाव के नतीजे आ जाएंगे। दिल्ली की नयी सरकार का गठन होगा। लेकिन दिल्ली में एक वक्त ऐसा भी था जब दिल्ली में ना तो कोई मुख्यमंत्री होता था और ना ही दिल्ली विधानसभा का अस्तित्व था। सन् 1956 से लेकर सन् 1993 तक दिल्ली में कोई विधानसभा नहीं थी। सीट एक, विधायक दो – दिल्ली का पहला चुनाव आजादी के बाद दिल्ली विधानसभा अस्तित्व में आयी थी। ये निर्धारित किया गया था कि दिल्ली विधानसभा में 48 सीटें होंगी। तब व्यवस्था ऐसी थी कि कुछ सीटों पर दो विधायक निर्वाचित हो सकते थे। इस तरह दिल्ली की कई सीटों पर दो-दो एमएलए

Articles, Reporting Diary

पीजी लाइन का सफर

बात सन् 2003 की है। मैंने ईटीवी (ईनाडू टेलीविजन, जो अब नेटवर्क 18 हो चुका है) की नौकरी छोड़कर सहारा न्यूज चैनल को ज्वाइन किया था। तबतक सहारा मीडिया के क्षेत्र में एक स्थापित नाम हो चुका था। सहारा पहली बार 24 घंटे का रीजनल चैनल शुरु करने का प्लान लेकर आया था। हिन्दी भाषी क्षेत्रों में तबतक ईटीवी ही न्यूज की दुनिया में छाया हुआ था। लेकिन ईटीवी मूल रुप से मनोरंजन चैनल था। इसमें बीच-बीच में न्यूज बुलेटिन प्रसारित होते थे। शाम सात बजे प्रसारित होने वाला बिहार-झारखंड बुलेटिन तबतक लोगों में खासा लोकप्रिय हो चुका था। शाम सात बजे पहले बिहार और फिर साढ़े सात बजे झारखंड की खबरें आती थ

Articles, Cinema

फिल्म समीक्षा – सरदार उधम

अमेजन प्राइम पर वर्ल्डवाइड रिलीज हुई फिल्म ‘सरदार उधम’ देशभक्ति की आम बॉलीवुड फिल्मों की श्रेणी से अलग नजर आती है। फिल्म में देशभक्ति को बॉलीवुड फिल्मों के एक मसाले के तौर पर इस्तेमाल करने से परहेज किया गया है। फिल्म देखते वक्त न तो आपकी रगों का खून उबलेगा और न ही जबरदस्ती का जोश दिमाग पर चढ़ कर बोलेगा। फिर भी फिल्म धीरे से आपके दिल और दिमाग के भीतर उतर जाएगी। लेकिन वैसे दर्शक जिनको बॉलीवुड स्टाइल की देशभक्ति देखने की आदत है, फिल्म से जरुर निराश होंगे। फिल्म एक बायोपिक है और निर्देशक सुजीत सरकार अपने उद्देश्य के प्रति पूरी तरह सजग और समर्पित नजर आते हैं। फिल्म सरदार

Articles, Cinema

ऋषि कपूर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है. कम लोगों को पता होगा……

ऋषि कपूर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है. कम लोगों को पता होगा कि ऋषि कपूर सांपों से काफी बचते थे. ऐसे में फिल्म निर्देशक हरमेश मल्होत्रा उन्हें नगीना फिल्म में हीरो के रुप में साइन करने पहुंचे. फिल्म नायिका प्रधान थी और ज्यादातर बड़े नाम फिल्म करने से कतरा रहे थे. 1986 में रिलीज़ हुई फिल्म नगीना अपने समय की सुपरहिट फिल्म रही है. फिल्म इच्छाधारी नागिन की कहानी पर आधारित थी. इस फिल्म की कामयाबी के बाद फिल्म की नायिका श्रीदेवी स्टारडम की दौड़ में अपनी समकालीन अभिनेत्रियों से काफी आगे निकल गयी थी. यूं तो श्रीदेवी फिल्म के लिए हरमेश मल्होत्रा की पहली पसंद नहीं थी. हरमेश पहले जयाप

Articles, Cinema

फ़िल्म अभिनेता इरफ़ान का जाना खल गया। वो सिनेमा के पर्दे पर दिखाई पड़ने वाले सबसे संजीदा अभिनेताओं में एक थे।

ये संयोग की ही बात है कि लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर दिखाए जाने दो पुराने धारावाहिकों में इस वक़्त वो भी दिखाई पड़ रहे हैं। चाणक्य और श्रीकांत इन दोनों ही धारावाहिकों में आप इरफ़ान को उनके कॅरियर के शुरूआती दिनों में देख सकते हैं। दरअसल इरफ़ान ने सिनेमा के परदे पर दिखने से बहुत पहले टीवी के छोटे परदे पर अपनी पहचान बनायीं थी। 1985-86 में आए धारावाहिक श्रीकांत में इरफ़ान एक अच्छी भूमिका में नज़र आए। मगर उनमे अभिनय की कैसी जबरदस्त क्षमता है इसका नज़ारा उन्होंने पेश किया एक टेलीप्ले में। दरअसल 1988 में दूरदर्शन ने टेलीप्ले की एक सिरीज़ दिखाई थी। इन्ही में से एक प्ले था – लाल घास पर